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ऐसे भोजन जिनसे गठिया के रोगियों को बचना चाहिए

ऐसे भोजन जिनसे गठिया के रोगियों को बचना चाहिए



नूर अल शाम: अल्लाह की शांति आपके ऊपर बनी रहे, डॉक्टर। गठिया के रोगियों के लिए फायदेमंद खाद्य पदार्थ क्या है और किनसे उन्हें बचना चाहिए?

उत्तर:

यूरिक एसिड के संचय के परिणामस्वरुप गठिया होता है जो अधिक मात्रा में लाल मांस और फलियां खाने से बढ़ जाती है इसलिए, हम उनसे बचने की सलाह देते हैं।

ये एसिड आपके शरीर में फॉस्फोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे अन्य अम्लों के साथ जमा हो जाते हैं और जिसकी वजह से एओसिनोफिल्स उत्पन्न होते हैं, जो प्रदाह कोशिकाएं हैं और अम्लीय परिवेश को पसंद करती हैं। इस प्रकार, सूजन शुरू होती  है।(Rock et.al., 2013) 

जब गठिया (जोड़ों की सूजन) होता है तो यह आमतौर पर दर्द,सूजन, लालिमा, गर्माहट और इन जोड़ों की गतिविधि में कठिनाई से संबंधित है।(Baer)   प्रदाहक मध्यस्थों के निष्कासन और विघटन के कारण और फलस्वरूप, सूजन की वजह से ऊतकों को नुकसान पहुंचता है इन मध्यस्थों में प्रोस्टाग्लैंडीन शामिल है, जो अदरक से प्रभावित हो सकता है(Grzanna et.al., 2005) ब्रायकिनिन, पदार्थ पी, लेकोट्रीन अन्य रासायनिक अणु इन मध्यस्थों में से हैं (Kidd et.al., 2001) यह उल्लेखनीय है कि आधुनिक दवाइयां केवल प्रोस्टाग्लैंडीन को अवरोधित करने में सक्षम हैं, जबकि अन्य प्रदाहक मध्यस्थ अप्रभावित रहते हैं, जिससे सूजन बनी रहती है। यह इससे पता चलता है कि आधुनिक दवाओं का प्रयोग करके पूरा आराम क्यों नहीं मिलता और केवल अस्थायी रूप से राहत क्यों मिलती है।इसके अलावा, NSAIDS जैसी आधुनिक दवाएं, जिसे "नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स" के नाम से जाना जाता है जैसे प्रोफेन, या वोल्टरेन  इनकी वजह से पेट में रक्तस्त्राव, (Woolston) गैस्ट्रिटिस अल्सर, गुर्दे खराब होने, (Ejaz et.al., 2004) ब्रोन्कियल समस्याएं और एलर्जिक अस्थमा जैसी समस्या हो सकती है(Ayuso et.al.) ऐसी दवाएं छह में से केवल एक प्रदाहक अणु को अवरोधित करने में सक्षम हैं जैसे प्रोस्टाग्लैंडीन। 

 लेकिन हमें एक तरीका विकसित किया है, जिसमें छह औषधियों को दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कई अध्ययनों ने इन प्रदाहक मध्यस्थों में से एक को रोकने के लिए प्रत्येक औषधियों की कारगरता को साबित किया है।इसलिए, हमारी दवा का असर केवल प्रोस्टैग्लैंडीन तक सीमित नहीं है यह सभी प्रदाहक मध्यस्थों को समाप्त करता है। इस प्रकार, सूजन, इसके परिणामस्वरूप होने वाला दर्द और अन्य सभी कष्टदायक लक्षण पूरी तरह से नियंत्रित हो जाते हैं। हमारी विधि तेल और सिरका दोनों में अत्यंत शुद्ध जैतून के तेल में संरक्षित रोज़मैरी का तैलीय सत्त, (Mohamed et.al., 2008) प्राकृतिक जैतून के तेल में संरक्षित लैवेंडर का तैलीय सत्त, (Hale, 2005 )  प्राकृतिक जैतून के तेल में संरक्षित अदरक का तैलीय सत्त, (Srivastava et.al., 1992) प्राकृतिक जैतून के तेल में संरक्षित सेज का तैलीय सत्त, प्राकृतिक जैतून के तेल में संरक्षित कैमोमाइल का तैलीय सत्त का उपयोग करती है।(Ghavimi et.al., 2012) तेल में प्राकृतिक जैतून के तेल में संरक्षित अजवायन के फूलों का का तैलीय सत्त (Stahl-Biskup et.al., 2003)  और सिरके में प्राकृतिक सेब के सिरके में संरक्षित तुलसी का जलीय सत्त (Yamada et.al., 2013) के अतिरिक्त और इससे अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं

तेलों के मिश्रण को दर्द से राहत पाने के लिए जोड़ों पर लगाया जा सकता है, यह दर्दनाशकों के प्रयोग के बिना तेजी से दर्द में आराम देता है।


जमिल अल क़ुद्सी

एमडी-एमएससी सीएएम-डुप एफएम




Ayuso, P., Carmen Plaza-Serón, M. D., Blanca-López, N., Doña, I., Campo, P., Laguna, J. J., Bartra, J., Soriano-Gomis, V., Torres, M. J., Blanca, M., Cornejo-Garcia, J. A. & Perkins, J. R. Genetic variants in arachidonic acid pathway genes associated with nsaids-exacerbated respiratory disease. Journal of Allergy and Clinical Immunology, 135, AB114.


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